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मौत की नींद सो गय दुनियां को हंसाने वाले आखिरी इच्छा,जब मैं मर जाऊंगा

अभिनेता जूनियर महमूद कई फिल्मों का हिस्सा रहे हैं. अपने फिल्मी करियर में, वह धमाकेदार कॉमेडी और एक्टिंग स्कील्स से सिनेप्रेमियों को हंसाने में कामयाब रहे हैं, लेकिन दुख की बात है कि 67 वर्षीय कलाकार का पेट के कैंसर से लंबी लड़ाई के बाद आज निधन हो गया.

जूनियर महमूद, जिनका जन्म नईम सैय्यद के रूप में हुआ था, को ‘कारवां’, ‘हाथी मेरे साथी’ और ‘मेरा नाम जोकर’ जैसी फिल्मों के लिए जाना जाता था. उन्होंने एक बाल कलाकार के रूप में ‘मोहब्बत जिंदगी है’ (1966) और ‘नौनिहाल’ (1967) से शुरुआत की. साल 1968 की फिल्म ‘सुहाग रात में’ एक साथ अभिनय करने के बाद महमूद ने ही उन्हें स्क्रीन नाम जूनियर महमूद दिया था. जूनियर महमूद ने एक और इच्छा थी. उनका कहना था कि जब वो इस दुनिया से जाएं, तो सभी उन्हें अच्छे आदमी के तौर पर याद रखें.


जॉनी लीवर ने कही ये बात

जॉनी लीवर के मुताबिक, जूनियर महमूद का इलाज परेल के टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल में चल रहा था. उन्होंने कहा, “वह पेट के कैंसर से पीड़ित हैं. उनका स्वास्थ्य थोड़ा जटिल है. मैं नियमित रूप से उनके संपर्क में था, लेकिन उन्होंने कभी भी अपने स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों का जिक्र नहीं किया. मैं उनसे डेढ़ महीने पहले मिला था. मुझे एक ने बताया था उनके करीबी सहयोगियों ने बताया कि वह दस दिनों से अस्वस्थ हैं और तरल पदार्थ ले रहे हैं, और उन्हें कैंसर है. तभी मैं उनसे मिला और मुझे बताया गया कि उन्हें स्टेज चार का पेट का कैंसर है.”

जूनियर महमूद के बेटे ने कही ये बात जूनियर महमूद के छोटे बेटे हसनैन सैय्यद ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ”मेरे पिता पेट के कैंसर से जूझ रहे थे और उनका शुक्रवार रात दो बजे निधन हो गया. उनकी हालत पिछले 17 दिन से गंभीर बनी हुई थी. उनका एक महीने में 35 से 40 किलोग्राम वजन कम हो गया था.” उन्होंने कहा, जूनियर महमूद का असली नाम नईम सैय्यद था. उन्होंने एक बाल कलाकार के रूप में ‘मोहब्बत जिंदगी है’ (1966) और ‘नौनिहाल’ (1967) से फिल्मी कॅरियर की शुरुआत की थी. दिवंगत हास्य कलाकार महमूद ने 1968 में रिलीज हुई फिल्म ‘सुहाग रात’ में उनके साथ काम किया था और इसी दौरान उन्होंने सैय्यद को जूनियर महमूद नाम दिया था.

जूनियर महमूद के दोस्त ने कही ये बात

अभिनेता के करीबी मित्र सलाम काजी ने बताया कि जूनियर महमूद के पेट में दर्द था और एक स्थानीय चिकित्सक उनका उपचार कर रहे थे. उन्होंने बताया कि जब उनका वजन कम होने लगा तो उनके परिवार ने उन्हें टाटा मेमोरियल अस्पताल ले जाने का फैसला किया. काजी ने कहा, ”उन्होंने उनकी जांच की और वहां चिकित्सकों ने बताया कि उनके फेफड़े एवं यकृत में कैंसर है और उनके पेट में एक ट्यूमर है. उन्हें पीलिया भी था.”

बॉलीवुड इंडस्ट्री शोक में

फिल्म निर्देशक संजय गुप्ता उन फिल्मी हस्तियों में शामिल रहे, जिन्होंने जूनियर महमूद को सोशल मीडिया के जरिए सबसे पहले श्रद्धांजलि दी. संजय गुप्ता ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ”आप पूरी तरह से फिल्मों से जुड़े मेरे बचपन का एक अभिन्न हिस्सा थे. जूनियर महमूद, ईश्वर आपकी आत्मा को शांति दे. इतने वर्षों तक मनोरंजन करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद.” ‘ट्रेड यूनियन सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन’ ने भी अभिनेता के निधन पर शोक व्यक्त किया. जूनियर महमूद 1966 से इसके सदस्य थे.

जूनियर महमूद की आखिरी इच्छा

जूनियर महमूद ने अभिनेताओं जितेंद्र और सचिन पिलगांवकर से मिलने की इच्छा व्यक्त की थी, जिसके बाद दोनों ने मंगलवार को उनके आवास पर उनसे मुलाकात की थी. जितेंद्र ने ‘सुहाग रात’ और ‘कारवां’ सहित कई फिल्मों में जूनियर महमूद के साथ काम किया था. महमूद ने सात भाषाओं में 260 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया. उन्होंने ‘ब्रह्मचारी’, ‘कटी पतंग’, ‘हरे रामा हरे कृष्णा’, ‘गीत गाता चल’, ‘ईमानदार’, ‘बाप नंबरी बेटा दस नंबरी’, ‘आज का अर्जुन’, ‘गुरुदेव’, ‘छोटे सरकार’ और ‘जुदाई’ जैसी कई अन्य लोकप्रिय फिल्मों में काम किया. जूनियर महमूद ने 1965 में रिलीज हुई फिल्म ‘गुमनाम’ में महमूद के मशहूर गीत ‘हम काले हैं तो क्या हुआ’ पर 1968 में शम्मी कपूर अभिनीत फिल्म ‘ब्रह्मचारी’ में नृत्य करके वाहवाही बटोरी थी. उन्होंने अपने आदर्श महमूद के अंदाज की नकल करते हुए इस गीत पर न केवल नृत्य किया था, बल्कि उन्हीं की तरह धारीदार टी-शर्ट और लुंगी पहन कर अपने चेहरे पर काला रंग भी लगाया था.

रुला गए दुनिया को हंसाने वाले जूनियर महमूद, कैंसर से जंग लड़ने के बाद दुनिया को कहा अलविदा
सीरियल्स में भी काम कर चुके हैं जूनियर महमूद

अभिनेता ने ‘प्यार का दर्द है मीठा मीठा प्यारा प्यारा’ और ‘एक रिश्ता साझेदारी का’ जैसे टीवी धारावाहिकों में भी अभिनय किया था. काजी ने कहा कि अभिनेता का अंतिम संस्कार सांताक्रूज कब्रिस्तान में किया जाएगा. उन्होंने कहा, ”उन्हें उसी कब्रिस्तान में दफन किया जाएगा. जहां उनकी मां को दफनाया गया था. दिलीप कुमार साहब और मोहम्मद रफी जैसी अन्य प्रसिद्ध हस्तियों को भी वहीं दफनाया गया.” जूनियर महमूद के परिवार में उनके दो बेटे और पत्नी हैं.

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